आग मोहब्बत की और भी ज्यादा भड़काते हो तुम तो आग मोहब्बत की, सोजिश-ए-दिल को ऐ अश्को, क्या ख़ाक बुझाना सीखे हो। ❤️ Like (0) 🔗 Share 📋 Copy Related Shayari आसरा इक उम्मीद का रेत भरी है आँखों में मैंने दरिया से सीखी है कोई रेत की प्यास बुझाओ